वाह रे दुनिया

alfaazmeredilse

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कहने को तो दुनिया
बदल रही हैं
हर पल हर वक्त
पर अपनों को ही अपनों से
दूर कर रही है|

पहले का दौर भी
क्या हसीन हुआ करता था
सब एक साथ
हस्ते-गुनगुनाते, खाते-पीते थे
साथ बात–चीत करके दुःख-सुख बाँटते थे|

पर आज के
बदलते दौर ने
यह सब खुशियाँ छीन ली है
अब लोग एक साथ रह कर
भी एक साथ नहीं होते|

इस बदलाव का कारण कुछ और नहीं
बल्कि प्रोधोगिकी है
जहाँ इसने जीवन जीने का
ज़रिया आसन बनाया है
वहिं अपनो को अपनो से अलग कर दिखाया है|

आज कल परिवार के साथ कम
और गैजेट के साथ ज़्यादा
समय व्यतीत करते है
ये इनसान कि मुर्खता हि तो है

जो  इसे जीवन जीने का ज़रिया बनाता जा रहा है|

वह दिन दूर नही
जब परिवार और रिश्ते- नातो
का कोइ मोल न रह जायेग
और सब बस प्रोधोगिकरण
के गुलाम बनकर रह जाएगे|

अब…

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